कुबेर
కుబేరుడుகுபேரன்Kuber
अन्य नाम: Kubera · Kuber Dev · Vaishravana · Dhanapati · Dhanada · Yaksharaj · Alakapati · Kuberan · Kubera Bhagavan
कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष, यक्षों के राजा और उत्तर दिशा के रक्षक हैं। धनतेरस और दीपावली पर परिवार लक्ष्मी जी के साथ उनकी पूजा करते हैं, ताकि घर का धन सुरक्षित रहे और सही काम में लगे।
- त्योहार
- धनतेरस · दीपावली (लक्ष्मी पूजा)
कुबेर के पाठ
कथा
कुबेर ऋषि विश्रवा के पुत्र हैं, इसीलिए उन्हें वैश्रवण कहते हैं। रामायण और पुराण बताते हैं कि उन्होंने लंबा तप किया और ब्रह्मा जी ने उन्हें पृथ्वी के सब खज़ानों का स्वामी और उत्तर दिशा का दिक्पाल बनाया। पहले वे लंका में राज करते थे और पुष्पक विमान उनका था, पर उनके सौतेले भाई रावण ने दोनों छीन लिए। तब कुबेर कैलास के पास अलकापुरी में बसे, अपने मित्र शिव के समीप।
चित्रों में कुबेर शांत, स्थूल शरीर वाले राजा हैं, हाथ में धन का कलश, और पास में नेवला जो मुँह से रत्न गिराता है। वे धन बाँटते कम, संभालते ज़्यादा हैं; परंपरा कहती है कि जहाँ लक्ष्मी की पूजा होती है वहीं कुबेर धन देते हैं। दक्षिण भारत की प्रसिद्ध तिरुमला कथा में भगवान वेंकटेश्वर ने पद्मावती से विवाह के लिए कुबेर से ऋण लिया था, जिसे भक्त अपनी भेंट से चुकाने में हाथ बँटाते हैं।
धनतेरस पर लोग घर साफ़ करते हैं, धातु की कोई नई चीज़ खरीदते हैं और शाम को लक्ष्मी और कुबेर की साथ पूजा करते हैं। बहुत से लोग कुबेर यंत्र या छोटी मूर्ति घर की उत्तर दिशा में या दुकान की तिजोरी में रखते हैं।