हनुमान
హనుమాన్அனுமன்Hanuman
अन्य नाम: Bajrangbali · Anjaneya · Maruti · Pavanputra · Kesari Nandan · Sankat Mochan
हनुमान जी श्रीराम के परम भक्त हैं, माता अंजना और केसरी के पुत्र, जिन्हें पवनपुत्र भी कहते हैं। भक्त उन्हें संकटमोचन मानकर साहस और रक्षा के लिए पूजते हैं, खासकर मंगलवार और शनिवार को।
- पूजा का दिन
- मंगलवार · शनिवार
- त्योहार
- हनुमान जयंती
हनुमान के पाठ
कथा
परंपरा के अनुसार हनुमान जी का जन्म माता अंजना और वानरराज केसरी के घर, पवन देव के आशीर्वाद से हुआ। इसीलिए उन्हें पवनपुत्र कहते हैं। बहुत से भक्त उन्हें भगवान शिव का अंश भी मानते हैं। कथा है कि बचपन में वे उगते सूरज को पका फल समझकर उसकी ओर उछल पड़े थे। बाद में देवताओं ने उन्हें कई वरदान दिए।
किष्किंधा के वन में वे ब्राह्मण का वेश धरकर पहली बार श्रीराम से मिले, और तब से उनका पूरा जीवन राम जी की सेवा में बीता। उन्होंने राम जी और सुग्रीव की मित्रता कराई। समुद्र लाँघकर लंका पहुँचे, सीता माता को ढूँढा, उन्हें प्रभु की अँगूठी दी और फिर सोने की लंका में आग लगा दी। जब युद्ध में लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने हिमालय गए। बूटी पहचान न पाए तो पूरा पर्वत ही उठा लाए, और भोर होने से पहले लौट आए।
इतना बल होते हुए भी हनुमान जी ने सेवा के सिवा कभी कुछ नहीं माँगा। वे चिरंजीवियों में गिने जाते हैं। भक्तों का विश्वास है कि जहाँ रामनाम का कीर्तन होता है, वहाँ हनुमान जी ज़रूर होते हैं। लोग उनके लिए हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और मंगलवार व शनिवार को सिंदूर, लाल फूल और लड्डू चढ़ाते हैं।