श्री बजरंग बाण
Bajrang Baan
श्री बजरंग बाण अवधी में हनुमान जी से की जाने वाली एक आर्त प्रार्थना है, जिसे परंपरा गोस्वामी तुलसीदास की रचना मानती है। इसके ३४ पदों (एक आरंभिक दोहा, ३२ चौपाइयाँ और एक समापन दोहा) में हनुमान जी से विनती है कि वे बाण की तरह दौड़कर भक्त की रक्षा करें और हर बाधा नष्ट करें। इसका पाठ ख़ासकर मंगलवार और शनिवार को, और भय या मुश्किल के समय किया जाता है।
- 34 पद
- 7 मिनट
- परंपरा से गोस्वामी तुलसीदास को आरोपित
- उत्तम दिन: मंगलवार, शनिवार
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।Nishchay Prem Prateeti Te, Binay Karain Sanman
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥Tehi Ke Karaj Sakal Shubh, Siddh Karain Hanuman
जो दृढ़ निश्चय, प्रेम और विश्वास के साथ आदरपूर्वक विनती करते हैं, उनके सब शुभ कार्य हनुमान जी सिद्ध करते हैं।
जय हनुमंत संत हितकारी।Jai Hanumant Sant Hitkari
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥Sun Lijai Prabhu Araj Hamari
संतों का हित करने वाले हनुमान जी, आपकी जय हो! हे प्रभु, मेरी विनती सुन लीजिए।
जन के काज बिलंब न कीजै।Jan Ke Kaj Bilamb Na Kijai
आतुर दौरि महा सुख दीजै॥Atur Dauri Maha Sukh Dijai
अपने भक्त के कार्य में देर न कीजिए; शीघ्र दौड़कर आइए और महान सुख दीजिए।
जैसे कूदि सिंधु महिपारा।Jaise Koodi Sindhu Mahipara
सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥Sursa Badan Paithi Bistara
जैसे आप समुद्र लाँघकर उस पार पहुँचे, और सुरसा के फैले हुए मुख में प्रवेश करके (बाहर निकल आए)…
सुंदरकांड: नागमाता सुरसा ने मार्ग रोककर हनुमान जी की परीक्षा ली; उन्होंने विशाल रूप बढ़ाया, फिर अति लघु होकर उसके मुख में प्रवेश किया और बाहर निकल आए।
आगे जाय लंकिनी रोका।Aage Jaye Lankini Roka
मारेहु लात गई सुरलोका॥Marehu Lat Gai Surloka
आगे जाने पर लंकिनी ने आपको रोका; आपने उसे एक प्रहार किया और वह सुरलोक चली गई।
लंका की द्वाररक्षिका लंकिनी हनुमान जी के प्रहार से शापमुक्त हुई।
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा।Jaye Bibhishan Ko Sukh Dinha
सीता निरखि परमपद लीन्हा॥Sita Nirakhi Parampad Linha
आपने जाकर विभीषण को सुख दिया और सीता जी के दर्शन करके परम आनंद पाया।
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा।Bag Ujari Sindhu Mah Bora
अति आतुर जमकातर तोरा॥Ati Atur Jamkatar Tora
आपने रावण की वाटिका उजाड़कर समुद्र में डुबो दी, और बड़ी शीघ्रता से यम की कटार जैसे भयंकर रक्षकों को तोड़ डाला।
'जमकातर' (यम की कटार) से परंपरागत रूप से अशोक वाटिका के भयंकर राक्षस रक्षक समझे जाते हैं।
अक्षय कुमार मारि संहारा।Akshay Kumar Mari Sanhara
लूम लपेटि लंक को जारा॥Loom Lapeti Lank Ko Jara
आपने अक्षयकुमार को मारकर उसका संहार किया और पूँछ लपेटकर लंका को जला दिया।
अक्षयकुमार रावण का पुत्र था, जिसे हनुमान जी ने अशोक वाटिका में मारा।
लाह समान लंक जरि गई।Lah Saman Lank Jari Gai
जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥Jai Jai Dhuni Surpur Nabh Bhai
लंका लाख की तरह जल गई, और देवलोक तथा आकाश में जय-जयकार की ध्वनि गूँज उठी।
अब बिलंब केहि कारन स्वामी।Ab Bilamb Kehi Karan Swami
कृपा करहु उर अंतरयामी॥Kripa Karahu Ur Antaryami
हे स्वामी, अब देर किस कारण है? हे हृदय की बात जानने वाले अंतर्यामी, कृपा कीजिए।
जय जय लखन प्रान के दाता।Jai Jai Lakhan Pran Ke Data
आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥Atur Hvai Dukh Karahu Nipata
लक्ष्मण जी को प्राण देने वाले, आपकी जय हो, जय हो! शीघ्रता करके मेरे दुःख का नाश कीजिए।
जै हनुमान जयति बल-सागर।Jai Hanuman Jayati Bal Sagar
सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥Sur Samooh Samrath Bhat Nagar
हे बल के सागर हनुमान जी, आपकी जय हो! आप देवताओं के समूह में समर्थ और योद्धाओं में श्रेष्ठ हैं।
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले।Om Hanu Hanu Hanu Hanumant Hatheele
बैरिहि मारु बज्र की कीले॥Bairihi Maru Bajra Ki Keele
ॐ! हे हठीले हनुमान, प्रहार कीजिए, प्रहार कीजिए! शत्रु को वज्र की कीलों जैसे प्रहारों से मारिए।
'हनु' संस्कृत धातु 'हन्' (प्रहार करना) से है। परंपरा में 'शत्रु' से भय, क्रोध, मोह जैसे भीतरी शत्रु भी समझे जाते हैं।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा।Om Hreem Hreem Hreem Hanumant Kapisa
ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥Om Hum Hum Hum Hanu Ari Ur Seesa
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं, हे कपीश्वर हनुमान! ॐ हुं हुं हुं, शत्रु के हृदय और सिर पर प्रहार कीजिए।
ह्रीं और हुं बीजाक्षर हैं। इनका जप किया जाता है, इनका अनुवाद नहीं किया जाता। कुछ छपाइयों में ह्नीं या हीं दिखता है, जो ह्रीं के ही मुद्रण-रूप हैं।
जय अंजनि कुमार बलवंता।Jai Anjani Kumar Balvanta
शंकरसुवन बीर हनुमंता॥Shankar Suvan Beer Hanumanta
हे बलवान अंजनीकुमार, शंकरसुवन वीर हनुमान, आपकी जय हो!
बदन कराल काल-कुल-घालक।Badan Karal Kal Kul Ghalak
राम सहाय सदा प्रतिपालक॥Ram Sahay Sada Pratipalak
आपका मुख विकराल है; आप काल के कुल का भी नाश करने वाले, श्रीराम के सहायक और सदा रक्षा करने वाले हैं।
भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर।Bhoot Pret Pisach Nisachar
अगिन बेताल काल मारी मर॥Agin Betal Kal Mari Mar
भूत, प्रेत, पिशाच, निशाचर, अग्नि-बेताल, काल, महामारी और मरी…
यह चौपाई और अगली मिलकर एक वाक्य हैं: भक्त हनुमान जी से इन सब बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करता है।
इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की।Inhen Maru Tohi Sapath Ram Ki
राखु नाथ मरजाद नाम की॥Rakhu Nath Marjad Naam Ki
…इन सबका नाश कीजिए, आपको श्रीराम की शपथ है! हे नाथ, अपने नाम की मर्यादा रखिए।
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै।Satya Hohu Hari Sapath Pai Kai
राम दूत धरु मारु धाइ कै॥Ram Doot Dharu Maru Dhai Kai
श्रीहरि की शपथ पाकर उसे सत्य कीजिए; हे रामदूत, दौड़कर (शत्रु को) पकड़िए और मारिए!
जय जय जय हनुमंत अगाधा।Jai Jai Jai Hanumant Agadha
दुख पावत जन केहि अपराधा॥Dukh Pavat Jan Kehi Apradha
हे अगाध (असीम) हनुमान जी, आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आपका भक्त किस अपराध से दुःख पा रहा है?
पूजा जप तप नेम अचारा।Pooja Jap Tap Nem Achara
नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥Nahi Janat Kachhu Das Tumhara
पूजा, जप, तप, नियम और आचार: आपका यह दास इनमें से कुछ भी नहीं जानता।
कुछ संस्करणों में 'नहिं जानत हौं दास तुम्हारा' पाठ है; भाव वही है।
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं।Ban Upban Mag Giri Grih Mahin
तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥Tumhare Bal Haun Darpat Nahin
वन में, उपवन में, मार्ग में, पर्वत पर या घर में, आपके बल के सहारे मैं कहीं नहीं डरता।
जनकसुता हरि दास कहावौ।Janaksuta Hari Das Kahavau
ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥Taki Sapath Bilamb Na Lavau
आप जनकनंदिनी सीता जी और श्रीहरि के दास कहलाते हैं; उसी की शपथ है, अब देर न कीजिए।
जै जै जै धुनि होत अकासा।Jai Jai Jai Dhuni Hot Akasa
सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥Sumirat Hoy Dusah Dukh Nasa
आकाश में जय-जयकार की ध्वनि हो रही है; आपका स्मरण करते ही असहनीय दुःख का भी नाश हो जाता है।
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं।Charan Pakari Kar Jori Manavaun
यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥Yahi Ausar Ab Kehi Goharavaun
आपके चरण पकड़कर, हाथ जोड़कर मैं आपको मनाता हूँ; इस घड़ी में अब और किसे पुकारूँ?
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई।Uthu Uthu Chalu Tohi Ram Duhai
पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥Payan Paraun Kar Jori Manai
उठिए, उठिए, चलिए! आपको श्रीराम की दुहाई है! मैं आपके पाँव पड़ता हूँ और हाथ जोड़कर मनाता हूँ।
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता।Om Cham Cham Cham Cham Chapal Chalanta
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥Om Hanu Hanu Hanu Hanu Hanumanta
ॐ चं चं चं चं, हे चपल गति से चलने वाले! ॐ हनु हनु हनु हनु, हे हनुमान, प्रहार कीजिए!
'चं' वेग का भाव जगाने वाला बीजाक्षर है; ऐसे अक्षर ध्वनि के लिए जपे जाते हैं, उनका अनुवाद नहीं होता।
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल।Om Ham Ham Hank Det Kapi Chanchal
ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥Om Sam Sam Sahami Parane Khal Dal
ॐ हं हं, चंचल कपि हुंकार भरते हैं! ॐ सं सं, दुष्टों के दल सहमकर भाग जाते हैं।
अपने जन को तुरत उबारौ।Apne Jan Ko Turat Ubarau
सुमिरत होय आनंद हमारौ॥Sumirat Hoy Anand Hamarau
अपने भक्त को तुरंत उबार लीजिए; आपका स्मरण करते ही मुझे आनंद प्राप्त हो।
यह बजरंग-बाण जेहि मारै।Yah Bajrang Baan Jehi Marai
ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥Tahi Kahau Phiri Kavan Ubarai
यह बजरंग-बाण जिसे मारे, बताइए, फिर उसे कौन बचा सकता है?
इस स्तुति को 'बाण' इसलिए कहा गया कि यह स्वयं हनुमान जी की भाँति भक्त के संकटों पर लक्ष्य करके छोड़ा गया बाण है।
पाठ करै बजरंग-बाण की।Path Karai Bajrang Baan Ki
हनुमत रक्षा करै प्रान की॥Hanumat Raksha Karai Pran Ki
जो बजरंग-बाण का पाठ करता है, हनुमान जी उसके प्राणों की रक्षा करते हैं।
यह बजरंग बाण जो जापैं।Yah Bajrang Baan Jo Japain
तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥Tason Bhoot Pret Sab Kanpain
जो इस बजरंग-बाण का जप करते हैं, उनसे सब भूत-प्रेत काँपते हैं।
धूप देय जो जपै हमेसा।Dhoop Dey Jo Japai Hamesa
ताके तन नहिं रहै कलेसा॥Take Tan Nahin Rahai Kalesa
जो धूप देकर सदा इसका जप करता है, उसके शरीर में कोई क्लेश नहीं रहता।
यह पाठ के फल (फलश्रुति) का पारंपरिक वचन है; इसे चिकित्सीय दावा न समझें।
उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।Ur Prateeti Dridh, Saran Hvai, Path Karai Dhari Dhyan
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥Badha Sab Har, Karain Sab Kaam Saphal Hanuman
जो हृदय में दृढ़ विश्वास रखकर, शरण में आकर, ध्यानपूर्वक इसका पाठ करता है, हनुमान जी उसकी सब बाधाएँ हरकर सब कार्य सफल करते हैं।
कुछ छपाइयों में समापन दोहा भिन्न है: 'प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥'
पूर्ण
श्री बजरंग बाण का पाठ पूर्ण हुआ।
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प्रश्न
बजरंग बाण किसने लिखा?
परंपरा इसे गोस्वामी तुलसीदास की रचना मानती है, जिन्होंने हनुमान चालीसा और रामचरितमानस लिखे। पर यह उनके प्रारंभिक ग्रंथ-संग्रहों में नहीं मिलता, इसलिए कई विद्वान इस बात को पक्का नहीं मानते।
हनुमान चालीसा और बजरंग बाण में क्या अंतर है?
हनुमान चालीसा स्तुति है, जिसे बहुत से लोग रोज़ शांत मन से पढ़ते हैं। बजरंग बाण आर्त पुकार है, जिसमें हनुमान जी से दौड़कर रक्षा करने की विनती है, और इसमें 'ॐ ह्रीं', 'ॐ हुं' जैसे बीजाक्षर भी हैं। बहुत से भक्त रोज़ चालीसा पढ़ते हैं और मुश्किल समय में बजरंग बाण का पाठ करते हैं।
बजरंग बाण का पाठ कब करना चाहिए?
हनुमान जी की दूसरी प्रार्थनाओं की तरह मंगलवार और शनिवार को। भय, घर में बीमारी या किसी बड़ी मुश्किल के समय भी लोग इसका पाठ करते हैं। परंपरा कहती है कि स्नान के बाद, हनुमान जी के सामने दीप-धूप जलाकर, शांत और सच्चे मन से पाठ करें।
क्या कोई भी, महिलाएँ भी, बजरंग बाण पढ़ सकती हैं?
हाँ। स्त्री-पुरुष सभी घरों और मंदिरों में इसका पाठ करते हैं। बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं कि इसे विनम्रता और श्रद्धा से, अपनी रक्षा के लिए पढ़ें, किसी का बुरा चाहकर कभी नहीं।
क्या हर किताब में बजरंग बाण एक जैसा है?
नहीं। छपे हुए पाठों में पंक्तियों की संख्या और क्रम अलग-अलग है, और कुछ में अतिरिक्त पंक्तियाँ भी हैं। हमारा पाठ स्रोत में बताए गए प्रचलित मानक पाठ पर आधारित है। इसे अभी गीता प्रेस की छपाई से मिलाकर नहीं देखा गया है।
बजरंग बाण के पाठ में कितना समय लगता है?
आराम से पढ़ें तो लगभग ७ मिनट।
स्रोत और समीक्षा
स्रोत: Shri Bajrang Baan, standard printed text as given on hindi.webdunia.com and sritrimurtidham.org (both agree line for line), compared with sanskritdocuments.org (doc_z_otherlang_hindi/bajarangabaaNHindi) and hanumanbalajimandir.org
Versions differ considerably. Some add lines not in our text (e.g. 'गदा बज्र लै बैरिहिं मारो…', 'ॐकार हुंकार महाप्रभु धावो…', and a long passage beginning 'ताते विनती करौं पुकारी'), or order the middle chaupais differently. We print ह्रीं for the bija syllable that some printings show as ह्नीं/हीं. We could not consult a Gita Press printing of this text directly; a scholar should confirm against one.
मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।
ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।