कृष्ण जन्माष्टमी 2027
कृष्ण जन्माष्टमी श्रीकृष्ण का जन्मदिन है, जो भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की आधी रात को मनाया जाता है। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात की निशीथ पूजा के बाद व्रत खोलते हैं। 2027 में भारत में यह बुधवार, 25 अगस्त 2027 को है।
भारत की तिथि
बुधवार, 25 अगस्त 2027
Nishita puja 12:01 AM–12:45 AM (Aug 26) (New Delhi)
दुनिया भर की तिथियाँ · 2027
| क्षेत्र | तिथि | समय |
|---|---|---|
| भारतनई दिल्ली | बुधवार, 25 अगस्त 2027 | Nishita puja 12:01 AM–12:45 AM (Aug 26) (New Delhi) |
| अमेरिका (पूर्व)एडिसन, न्यू जर्सी | इस क्षेत्र की तिथि की हमने अभी पुष्टि नहीं की है। कृपया अपने स्थानीय मंदिर से पूछ लें। | |
| अमेरिका (पश्चिम)सैन होज़े, कैलिफ़ोर्निया | इस क्षेत्र की तिथि की हमने अभी पुष्टि नहीं की है। कृपया अपने स्थानीय मंदिर से पूछ लें। | |
| ब्रिटेनलंदन | इस क्षेत्र की तिथि की हमने अभी पुष्टि नहीं की है। कृपया अपने स्थानीय मंदिर से पूछ लें। | |
| कनाडाटोरंटो | इस क्षेत्र की तिथि की हमने अभी पुष्टि नहीं की है। कृपया अपने स्थानीय मंदिर से पूछ लें। | |
| ऑस्ट्रेलियासिडनी | इस क्षेत्र की तिथि की हमने अभी पुष्टि नहीं की है। कृपया अपने स्थानीय मंदिर से पूछ लें। | |
तिथि स्रोत: drikpanchang.com (नई दिल्ली). हर क्षेत्र और वर्ष की तिथि उद्धृत प्रकाशित पंचांग से ली गई है; जिन क्षेत्रों की पुष्टि नहीं हो सकी, वे छोड़ दिए गए हैं।
परिचय
श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में आधी रात को, रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं, लड्डू गोपाल का पालना सजाते हैं और भजन गाते हैं। रात के निशीथ काल में कान्हा को पंचामृत से नहलाकर नए कपड़े पहनाते हैं और माखन-मिश्री व पंजीरी का भोग लगाते हैं। अगले दिन दही हांडी होती है।
दक्षिण भारत के घरों में दरवाज़े से पूजा घर तक चावल के आटे से नन्हे पैरों के निशान बनाए जाते हैं, मानो बाल कृष्ण घर में आए हों। इस्कॉन और कुछ वैष्णव मंदिर कई बार यह पर्व घरेलू पंचांग की तारीख़ से एक दिन बाद मनाते हैं।
पूजा विधि
हर चरण पूरा होने पर टिक करते जाएँ। ये टिक केवल इसी डिवाइस पर रहते हैं।
रीति-रिवाज परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं। जहाँ अंतर हो, अपनी पारिवारिक परंपरा और मंदिर का पालन करें।
पूजा सामग्री
पाठ करें
प्रश्न
2027 में कृष्ण जन्माष्टमी भारत में कब है?
बुधवार, 25 अगस्त 2027 को (नई दिल्ली पंचांग)। व्रत बुधवार को रहेगा और निशीथ पूजा रात 12:01 से 12:45 तक, यानी गुरुवार 26 अगस्त की शुरुआती घड़ियों में।
हम विदेश में रहते हैं। क्या हमारे यहाँ भी यही तारीख़ है?
हम सिर्फ़ भारत की तारीख़ देते हैं। विदेश में दिन एक आगे-पीछे हो सकता है और आधी रात की पूजा का समय हर शहर में अलग होता है। अपने नज़दीकी मंदिर से पूछ लें।
जन्माष्टमी कभी-कभी दो दिन क्यों होती है?
जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र अलग-अलग रातों में पड़ते हैं, तो स्मार्त और वैष्णव अलग दिन मना सकते हैं। इस्कॉन और कुछ वैष्णव मंदिर कई बार घरेलू पंचांग से एक दिन बाद मनाते हैं। अपने मंदिर या संप्रदाय की परंपरा मानें।
व्रत कब खोलें?
ज़्यादातर परिवार आधी रात की पूजा के बाद प्रसाद से व्रत खोलते हैं। कुछ लोग अगली सुबह सूर्योदय के बाद पारण करते हैं। अपने घर की रीति से चलें।
उस दिन छुट्टी नहीं है। क्या वीकेंड पर मना सकते हैं?
हो सके तो व्रत और रात की पूजा उसी दिन करें। पूजा देर रात होती है, इसलिए नौकरी वाले परिवार भी दफ़्तर के बाद कर लेते हैं। पास वाले वीकेंड पर मंदिर का कार्यक्रम बच्चों के लिए अच्छा रहता है।