वक्रतुण्ड महाकाय

Vakratunda Mahakaya

वक्रतुण्ड महाकाय गणेश जी का दो पंक्तियों का संस्कृत श्लोक है, और सबसे ज़्यादा बोले जाने वाले श्लोकों में से एक है। इसमें करोड़ों सूर्यों जैसे तेज वाले, टेढ़ी सूँड वाले प्रभु से विनती है कि वे हमारे सभी काम बिना विघ्न के पूरे करें। परंपरा से इसे हर पूजा, पढ़ाई, यात्रा या नए काम से पहले बोलते हैं, और बुधवार व गणेश चतुर्थी पर ११, २१ या १०८ बार जपते हैं।

  • 1 पद
  • 0.5 मिनट
  • पारंपरिक गणेश श्लोक
  • उत्तम दिन: बुधवार

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वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥Nirvighnam Kuru Me Deva Sarvakaryeshu Sarvada

हे टेढ़ी सूँड और विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी प्रभु! हे देव, मेरे सभी कार्यों को सदा विघ्नरहित कीजिए।

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प्रश्न

वक्रतुण्ड महाकाय का जाप कब करना चाहिए?

किसी भी काम की शुरुआत से पहले: पूजा, परीक्षा, यात्रा, नई नौकरी, गृहप्रवेश या विवाह। परंपरा में विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा सबसे पहले होती है। बुधवार, संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी के दस दिनों में लोग इसका जाप भी करते हैं।

वक्रतुण्ड मंत्र कितनी बार पढ़ना चाहिए?

किसी काम से पहले एक बार काफ़ी है। जाप के लिए ११, २१ या १०८ बार पढ़ने की परंपरा है, अक्सर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला पर। २१ की संख्या गणेश जी से ख़ास जुड़ी है; पूजा में उन्हें २१ दूर्वा और २१ मोदक भी चढ़ाते हैं।

वक्रतुण्ड महाकाय किस ग्रंथ से है?

किसी एक ग्रंथ से इसका स्रोत पक्के तौर पर नहीं जुड़ता। यह पारंपरिक मंगलाचरण है, जो हर क्षेत्र और संप्रदाय की पूजा-पुस्तकों में मिलता है।

क्या बच्चे या नए लोग इसे बोल सकते हैं?

हाँ। यह छोटा है, और बच्चे अक्सर इसे सबसे पहले सीखते हैं।

वक्रतुण्ड का अर्थ क्या है?

वक्र यानी टेढ़ी और तुण्ड यानी सूँड, तो वक्रतुण्ड का अर्थ है टेढ़ी सूँड वाले। महाकाय का अर्थ है विशाल शरीर वाले।

स्रोत और समीक्षा

स्रोत: Traditional Ganesha invocation (cross-checked: shlokam.org "Vakratunda Mahakaya"; bhaktibharat.com "Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok"; drikpanchang.com Vakratunda Mahakaya Mantra)

The source text of this shloka is not firmly established; it is a traditional invocation. Some prints (e.g. drikpanchang) prefix "श्री" (Shri Vakratunda). A less common reading is "कोटिसूर्यसमप्रभ" (same meaning). Popular prints often write "वक्रतुंड" with anusvara; we keep the Sanskrit spelling "वक्रतुण्ड".

मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।

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त्रुटि बताएँ अंतिम अद्यतन 2026-09-27

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