जय अम्बे गौरी

Jai Ambe Gauri

जय अम्बे गौरी माँ दुर्गा की सबसे ज़्यादा गाई जाने वाली हिंदी आरतियों में से एक है, जिसमें उन्हें अम्बे, गौरी और श्यामा कहा गया है। टेक और बारह पदों में सिंह पर विराजी देवी के तेजस्वी रूप का और महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ, चण्ड-मुण्ड व रक्तबीज पर उनकी विजय का वर्णन है। नवरात्रि की हर शाम, अक्सर गरबा से पहले, और मंगलवार व शुक्रवार को इसे गाते हैं।

  • 13 पद
  • 6 मिनट
  • पारंपरिक; अंतिम पद में शिवानंद स्वामी का नाम
  • उत्तम दिन: मंगलवार, शुक्रवार

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जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

हे अम्बे गौरी, आपकी जय हो! हे मैया श्यामा गौरी, आपकी जय हो! विष्णु, ब्रह्मा और शिव दिन-रात आपका ध्यान करते हैं।

माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।Maang Sindoor Virajat, Tiko Mrigmad Ko

उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥Ujjwal Se Dou Naina, Chandravadan Niko

आपकी माँग में सिंदूर शोभित है और माथे पर कस्तूरी का टीका है। आपके दोनों नेत्र उज्ज्वल हैं और चंद्रमा-सा मुख अत्यंत सुंदर है।

टेक

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।Kanak Saman Kalevar, Raktambar Raje

रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥Raktapushp Gal Mala, Kanthan Par Saje

आपकी देह स्वर्ण के समान दमकती है और लाल वस्त्र शोभा पाते हैं। गले में लाल फूलों की माला सुशोभित है।

टेक

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।Kehari Vahan Rajat, Khadag Khappar Dhari

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥Sur Nar Munijan Sevat, Tinke Dukhhari

आप सिंह पर विराजमान हैं और खड्ग व खप्पर धारण करती हैं। देवता, मनुष्य और मुनिजन आपकी सेवा करते हैं और आप उनके दुख हरती हैं।

टेक

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।Kanan Kundal Shobhit, Nasagre Moti

कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥Kotik Chandra Divakar, Sam Rajat Jyoti

कानों में कुण्डल शोभित हैं और नाक के अग्रभाग पर मोती है। आपकी ज्योति करोड़ों चंद्रमाओं और सूर्यों के समान दमकती है।

टेक

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।Shumbh Nishumbh Bidare, Mahishasur Ghati

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥Dhumra Vilochan Naina, Nishdin Madmati

आपने शुम्भ और निशुम्भ को विदीर्ण किया और महिषासुर का वध किया। धूम्रलोचन का अंत करने वाले आपके नेत्र दिन-रात दिव्य मद से भरे रहते हैं।

टेक

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।Chand Mund Sanhare, Shonit Beej Hare

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥Madhu Kaitabh Dou Maare, Sur Bhayheen Kare

आपने चण्ड-मुण्ड का संहार किया और रक्तबीज को नष्ट किया, जिसके रक्त की हर बूँद से नया दैत्य जन्म लेता था। आपने मधु और कैटभ दोनों को मारा और देवताओं को निर्भय किया।

टेक

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।Brahmani Rudrani, Tum Kamala Rani

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥Agam Nigam Bakhani, Tum Shiv Patrani

आप ही ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला (लक्ष्मी) रानी हैं। आगम और निगम (वेद) आपका बखान करते हैं; आप शिव की पटरानी हैं।

टेक

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।Chaunsath Yogini Mangal Gavat, Nritya Karat Bhairon

बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥Bajat Taal Mridanga, Aru Bajat Damru

चौंसठ योगिनियाँ मंगल-गीत गाती हैं और भैरव नृत्य करते हैं। ताल और मृदंग बजते हैं और डमरू भी गूँजता है।

टेक

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।Tum Hi Jag Ki Mata, Tum Hi Ho Bharta

भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥Bhaktan Ki Dukh Harta, Sukh Sampatti Karta

आप ही जगत की माता हैं और आप ही उसका भरण-पोषण करती हैं। आप भक्तों के दुख हरती हैं और उन्हें सुख-सम्पत्ति देती हैं।

टेक

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।Bhuja Char Ati Shobhit, Var Mudra Dhari

मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥Manvanchhit Phal Pavat, Sevat Nar Nari

आपकी चारों भुजाएँ अत्यंत शोभायमान हैं और आप वर-मुद्रा धारण करती हैं। जो नर-नारी आपकी सेवा करते हैं, वे मनचाहा फल पाते हैं।

टेक

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।Kanchan Thaal Virajat, Agar Kapur Baati

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥Shri Malketu Mein Rajat, Koti Ratan Jyoti

सोने के थाल में अगर, कपूर और बाती सजी है। श्रीमालकेतु में यह ज्योति करोड़ों रत्नों के समान दमकती है।

टेक

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।Shri Ambe Ji Ki Aarti, Jo Koi Nar Gave

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥Kahat Shivanand Swami, Sukh Sampatti Pave

शिवानंद स्वामी कहते हैं कि जो कोई श्री अम्बे जी की यह आरती गाता है, उसे सुख और सम्पत्ति प्राप्त होती है।

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प्रश्न

क्या जय अम्बे गौरी और अम्बे तू है जगदम्बे काली एक ही आरती है?

नहीं। ये दुर्गा जी की दो अलग आरतियाँ हैं। जय अम्बे गौरी 'जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी' से शुरू होती है और 'ॐ जय' वाली धुन पर गाई जाती है। अम्बे तू है जगदम्बे काली की धुन और टेक अलग है। नवरात्रि में बहुत से परिवार शाम की आरती में दोनों एक के बाद एक गाते हैं।

जय अम्बे गौरी आरती कब गाई जाती है?

नवरात्रि की हर शाम, चैत्र और शारदीय दोनों नवरात्रों में। कई जगह गरबा शुरू होने से पहले यही आरती होती है। दुर्गा पूजा, दुर्गाष्टमी और हर मंगलवार व शुक्रवार को भी इसे गाते हैं; परंपरा में ये देवी के दिन हैं। देवी की प्रतिमा के सामने घी या कपूर का दीपक घुमाते हैं, घंटी बजाते हैं और ताली देते हैं।

जय अम्बे गौरी आरती के रचयिता कौन हैं?

परंपरा इसका श्रेय शिवानंद स्वामी नाम के भक्त को देती है, क्योंकि अंतिम पद में 'कहत शिवानंद स्वामी' आता है। उनके बारे में भरोसेमंद जानकारी बहुत कम है, और किताबों में उनके समय को लेकर एक राय नहीं है। यह आरती मंदिरों, घर की पूजा और सस्ती आरती-पुस्तिकाओं के ज़रिए उत्तर और पश्चिम भारत में फैली।

'श्यामा गौरी' का क्या अर्थ है?

गौरी यानी गौर वर्ण वाली, तेजस्विनी; यह पार्वती जी का नाम है। श्यामा यानी श्याम वर्ण वाली; यह नाम काली से जुड़ा है। दोनों नाम साथ लेकर आरती कहती है कि सौम्य और उग्र, दोनों रूप एक ही माँ के हैं।

इस आरती में कितना समय लगता है?

बारहों पद टेक के साथ गाएँ तो लगभग छह मिनट।

स्रोत और समीक्षा

स्रोत: Traditional Hindi aarti (signature: Shivanand Swami) as printed in popular aarti-sangrah booklets; text cross-checked against Drik Panchang (Hindi) and BhaktiBharat.com

Both sources agree on all twelve stanzas and their order. Minor spelling choices: 'निशदिन' (BhaktiBharat) over 'निशिदिन' (Drik Panchang); 'भैरों' over 'भैरूँ'; 'उज्ज्वल' (correct spelling) over the printed 'उज्जवल'. Many singers prefix the refrain with 'ॐ'. In stanza 10, some books read 'खड्ग खप्पर धारी' in place of 'वर-मुद्रा धारी'. This is a different aarti from 'Ambe Tu Hai Jagdambe Kali'.

मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।

ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।

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