सरस्वती वंदना (या कुन्देन्दु)
Saraswati Vandana (Ya Kundendu)
सरस्वती वंदना देवी सरस्वती की पारंपरिक संस्कृत प्रार्थना है, जो 'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला' से शुरू होती है। इसमें देवी को कुंद के फूल, चंद्रमा और हिम जैसी श्वेत, वीणा लिए और श्वेत कमल पर बैठी बताया गया है, और उनसे बुद्धि की सारी जड़ता दूर करने की प्रार्थना है। विद्यार्थी इसे पढ़ाई और परीक्षा से पहले बोलते हैं, देश के कई हिस्सों में स्कूल की प्रार्थना-सभा में यह गाई जाती है, और बसंत पंचमी पर इसका पाठ होता है।
- 3 पद
- 2 मिनट
- पारंपरिक संस्कृत श्लोक
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृताYa Kundendu Tushara Hara Dhavala Ya Shubhra Vastravrita
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।Ya Veena Vara Danda Mandita Kara Ya Shveta Padmasana
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिताYa Brahmachyuta Shankara Prabhritibhir Devaih Sada Vandita
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥Sa Maam Patu Saraswati Bhagavati Nihshesha Jadyapaha
जो कुंद के फूल, चंद्रमा, हिम और मोतियों के हार के समान श्वेत हैं; जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं; जिनके हाथ सुंदर वीणा से सुशोभित हैं; जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं; जिनकी ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि देवता सदा वंदना करते हैं, वे भगवती सरस्वती मेरी रक्षा करें और मेरी बुद्धि की समस्त जड़ता दूर करें।
- याजो
- कुन्दकुंद का फूल
- इन्दुचंद्रमा
- तुषारहिम, ओस
- हार(मोतियों का) हार
- धवलाश्वेत, उज्ज्वल
- शुभ्रवस्त्रावृताश्वेत वस्त्रों से ढकी
- वीणावरदण्डवीणा का सुंदर दंड
- मण्डितकराजिनके हाथ सुशोभित हैं
- श्वेतपद्मासनाश्वेत कमल पर आसीन
- ब्रह्माच्युतशंकरब्रह्मा, विष्णु और शिव
- प्रभृतिभिःआदि
- देवैःदेवताओं द्वारा
- सदासदा
- वन्दितावंदित, पूजित
- सावे
- मांमेरी
- पातुरक्षा करें
- भगवतीभगवती देवी
- निःशेषसंपूर्ण, कुछ भी शेष न छोड़ते हुए
- जाड्यापहाजड़ता को दूर करने वाली
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनींShuklam Brahma Vichara Sara Paramam Adyam Jagad Vyapinim
वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।Veena Pustaka Dharinim Abhayadam Jadyandhakarapaham
हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्Haste Sphatika Malikam Vidadhatim Padmasane Samsthitam
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥Vande Tam Parameshvarim Bhagavatim Buddhipradam Sharadam
मैं उन परमेश्वरी भगवती शारदा की वंदना करता हूँ, जो श्वेत वर्ण वाली, ब्रह्म-चिंतन का परम सार, आदिशक्ति और जगत में व्याप्त हैं; जो वीणा और पुस्तक धारण करती हैं, अभय देती हैं और जड़ता रूपी अंधकार को दूर करती हैं; जो हाथ में स्फटिक की माला लिए कमल के आसन पर विराजमान हैं और बुद्धि प्रदान करती हैं।
- शुक्लांश्वेत, शुद्ध
- ब्रह्मविचारसारपरमाम्ब्रह्म-चिंतन के सार रूप, परम
- आद्यांआदिशक्ति
- जगद्व्यापिनींजगत में व्याप्त
- वीणापुस्तकधारिणीम्वीणा और पुस्तक धारण करने वाली
- अभयदांअभय देने वाली
- जाड्यान्धकारापहाम्जड़ता रूपी अंधकार को दूर करने वाली
- हस्तेहाथ में
- स्फाटिकमालिकांस्फटिक की माला
- विदधतींधारण किए हुए
- पद्मासनेकमल के आसन पर
- संस्थिताम्विराजमान
- वन्देमैं वंदना करता हूँ
- तांउन
- परमेश्वरींपरमेश्वरी
- बुद्धिप्रदांबुद्धि देने वाली
- शारदाम्शारदा (सरस्वती)
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।Saraswati Namastubhyam Varade Kamarupini
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥Vidyarambham Karishyami Siddhir Bhavatu Me Sada
हे वर देने वाली, इच्छानुसार रूप धारण करने वाली सरस्वती, आपको नमस्कार है। मैं विद्या का आरंभ करने जा रहा हूँ; मुझे सदा सिद्धि प्राप्त हो।
- सरस्वतिहे सरस्वती
- नमस्तुभ्यंआपको नमस्कार
- वरदेहे वर देने वाली
- कामरूपिणिइच्छानुसार रूप धारण करने वाली
- विद्यारम्भंविद्या का आरंभ
- करिष्यामिकरूँगा
- सिद्धिःसिद्धि, सफलता
- भवतुहो
- मेमुझे
- सदासदा
पूर्ण
सरस्वती वंदना (या कुन्देन्दु) का पाठ पूर्ण हुआ।
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प्रश्न
'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है 'जो कुंद के फूल, चंद्रमा, हिम और मोतियों के हार जैसी श्वेत हैं'। यह इस प्रार्थना की पहली पंक्ति है। श्लोक के अंत में सरस्वती जी से बुद्धि की सारी 'जाड्य', यानी जड़ता, दूर करने की विनती है।
विद्यार्थियों को सरस्वती वंदना कब करनी चाहिए?
सुबह पढ़ाई से पहले, स्कूल के दिन की शुरुआत में, और परीक्षा, संगीत-अभ्यास या कोई नई विद्या शुरू करने से पहले। सबसे बड़ा दिन बसंत पंचमी है, जो सरस्वती जी का अपना पर्व है। बहुत से परिवार बच्चों को पहले छोटा श्लोक 'सरस्वति नमस्तुभ्यं' सिखाते हैं, क्योंकि इसमें बस कुछ पल लगते हैं।
'या कुन्देन्दु' के रचयिता कौन हैं?
पक्का किसी को नहीं पता। यह उस सरस्वती स्तोत्र का पहला श्लोक है जिसे परंपरा महर्षि अगस्त्य से जोड़ती है, और सदियों से मंदिरों, घरों और गुरुकुलों में इसका पाठ होता आया है। आज ज़्यादातर लोग इसे स्कूल की प्रार्थना-सभा से जानते हैं, और विदेश में हिंदी-संस्कृत की कक्षाओं से।
क्या सरस्वती वंदना पढ़ाई में मदद करती है?
परंपरा कहती है कि ध्यान से इसका पाठ करने पर साफ़ सोच और अच्छी याददाश्त के लिए सरस्वती जी की कृपा मिलती है। बहुत से विद्यार्थियों को लगता है कि पढ़ने बैठने से पहले इससे मन शांत होता है। प्रार्थना जड़ता दूर करने की है; पढ़ाई तो आपको ही करनी है।
क्या यह 'माँ शारदे' या 'वर दे, वीणावादिनी' वाली वंदना ही है?
नहीं। वे सरस्वती जी पर अलग हिंदी गीत हैं, जो स्कूलों में भी खूब गाए जाते हैं। यहाँ संस्कृत श्लोक दिए गए हैं।
इसमें कितना समय लगता है?
तीनों श्लोकों में लगभग दो मिनट।
स्रोत और समीक्षा
स्रोत: Traditional Saraswati shlokas; text cross-checked against Sanskrit Wikisource (सरस्वतीस्तोत्राणि) and sanskritdocuments.org (Shri Sarasvati Stotram, Agastyamuni Proktam, sarasvatiAgastya.itx; and Shri Sarasvati Stuti, sarasstuti.itx)
Shloka 1: sanskritdocuments.org gives both 'सदा पूजिता' and 'सदा वन्दिता'; Wikisource and most recitations use 'वन्दिता', which we follow. Shloka 2: one sanskritdocuments.org text reads 'शुद्धां' for 'शुक्लां'; we follow Wikisource and common recitation. Shloka 3 ('सरस्वति नमस्तुभ्यं') appears as verse 5 of the Agastya stotram and is commonly recited with the vandana. School and devotional song versions such as 'Maa Sharde' or 'Vara de, Veena-vadini' are separate Hindi compositions and are not included.
मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।
ये अर्थ हमारा पहला मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोई भूल दिखे तो हमें ज़रूर बताएँ।