जय पार्वती माता

Jai Parvati Mata

जय पार्वती माता शिव जी की अर्धांगिनी और गणेश जी की माता, देवी पार्वती की छोटी-सी हिंदी आरती है। इसकी टेक और सात पदों में सती के रूप में और फिर हिमालय की पुत्री के रूप में उनके जन्म, शुम्भ-निशुम्भ पर विजय और शिव जी के साथ उनके आनंद की याद है। महिलाएँ इसे तीज, करवा चौथ, गौरी पूजा और सोमवार को गाती हैं।

  • 8 पद
  • 4 मिनट
  • पारंपरिक
  • उत्तम दिन: सोमवार

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जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।Jai Parvati Mata, Jai Parvati Mata

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥Brahma Sanatan Devi, Shubh Phal Ki Data

हे पार्वती माता, आपकी जय हो! आप सनातन ब्रह्मस्वरूपा देवी हैं और शुभ फल देने वाली हैं।

अरिकुल कंटक नाशिनि, जय सेवक त्राता।Arikul Kantak Nashini, Jai Sevak Trata

जग जननी जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥Jag Janani Jagdamba, Harihar Gun Gata

आप शत्रुओं के समूह को काँटों की तरह नष्ट करती हैं। हे सेवकों की रक्षा करने वाली, आपकी जय हो! आप जगत की जननी जगदम्बा हैं; विष्णु और शिव आपके गुण गाते हैं।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।Jai Parvati Mata, Jai Parvati Mata

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥Brahma Sanatan Devi, Shubh Phal Ki Data

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल है साथा।Singh Ko Vahan Saje, Kundal Hai Satha

देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥Dev Vadhu Jas Gavat, Nritya Karat Tatha

सिंह की सवारी आपकी शोभा बढ़ाती है और कानों में कुण्डल हैं। देवताओं की पत्नियाँ आपका यश गाती हैं और 'ता था' की ताल पर नाचती हैं।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।Jai Parvati Mata, Jai Parvati Mata

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥Brahma Sanatan Devi, Shubh Phal Ki Data

सतयुग रूप शील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता।Satyug Roop Sheel Atisundar, Naam Sati Kahlata

हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥Hemanchal Ghar Janmi, Sakhiyan Sang Rata

सतयुग में अत्यंत सुंदर रूप और शील वाली आप सती कहलाईं। फिर आपने हिमालय के घर जन्म लिया और सखियों के संग आनंद से रहीं।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।Jai Parvati Mata, Jai Parvati Mata

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥Brahma Sanatan Devi, Shubh Phal Ki Data

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता।Shumbh Nishumbh Vidare, Hemanchal Sthata

सहस्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥Sahasra Bhuja Tanu Dhari Ke, Chakra Liyo Hatha

हिमालय पर निवास करने वाली आपने शुम्भ-निशुम्भ को चीर डाला। हज़ार भुजाओं वाला रूप धरकर आपने हाथ में चक्र लिया।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।Jai Parvati Mata, Jai Parvati Mata

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥Brahma Sanatan Devi, Shubh Phal Ki Data

सृष्टि रूप तुही है जननी, शिव संग रंगराता।Srishti Roop Tuhi Hai Janani, Shiv Sang Rangrata

नन्दी भृंगी बीन लही, सारा जग मदमाता॥Nandi Bhringi Been Lahi, Sara Jag Madmata

हे जननी, आप ही सृष्टि का रूप हैं और शिव जी के संग आनंद में रँगी रहती हैं। नन्दी और भृंगी वीणा उठाते हैं, और सारा जग आनंद में मग्न हो जाता है।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।Jai Parvati Mata, Jai Parvati Mata

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥Brahma Sanatan Devi, Shubh Phal Ki Data

देवन अरज करत हम, चरण ध्यान लाता।Devan Araj Karat Ham, Charan Dhyan Lata

तेरी कृपा रहे तो, मन नहिं भरमाता॥Teri Kripa Rahe To, Man Nahin Bharmata

देवताओं की तरह हम भी आपसे विनती करते हैं और आपके चरणों में ध्यान लगाते हैं। आपकी कृपा बनी रहे तो मन नहीं भटकता।

टेक

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।Jai Parvati Mata, Jai Parvati Mata

ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥Brahma Sanatan Devi, Shubh Phal Ki Data

मैया जी की आरती, भक्ति भाव से जो नर गाता।Maiya Ji Ki Aarti, Bhakti Bhav Se Jo Nar Gata

नित्य सुखी रह करके, सुख सम्पत्ति पाता॥Nitya Sukhi Rah Karke, Sukh Sampatti Pata

जो मनुष्य भक्ति भाव से मैया जी की आरती गाता है, वह सदा सुखी रहकर सुख-सम्पत्ति पाता है।

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प्रश्न

जय पार्वती माता आरती कब गाई जाती है?

गौरी पूजा के अंत में। यानी करवा चौथ की शाम, हरतालिका तीज, हरियाली तीज, गणगौर, सावन के मंगला गौरी व्रत, और बहुत से घरों में हर सोमवार। कुछ परिवार इसे 'ॐ जय शिव ओंकारा' के ठीक बाद गाते हैं।

क्या करवा चौथ पर यह आरती गा सकते हैं?

हाँ। करवा चौथ गौरी पूजा ही है, और बहुत से परिवार कथा के बाद, चाँद की प्रतीक्षा से पहले, इसी आरती से पूजा पूरी करते हैं। कुछ घरों में शिव जी या गणेश जी की आरती होती है; जैसा आपके घर का चलन हो, वैसा करें।

क्या पार्वती और दुर्गा एक ही हैं?

परंपरा इन्हें एक ही देवी के अलग-अलग रूप मानती है। पार्वती, यानी गौरी, शिव जी की सौम्य पत्नी और गणेश जी की माँ हैं; दुर्गा वही शक्ति हैं, योद्धा रूप में। इसीलिए इस आरती में भी शुम्भ-निशुम्भ के वध का ज़िक्र है।

इस आरती में कितना समय लगता है?

हर पद के बाद टेक गाएँ तो लगभग चार मिनट।

स्रोत और समीक्षा

स्रोत: Traditional Hindi aarti as printed in popular aarti-sangrah booklets; cross-checked line by line against BhaktiBharat.com, Drik Panchang (Hindi) and Bharat Discovery (bharatdiscovery.org)

All three sources have the refrain and seven stanzas in the same order. We follow BhaktiBharat for the stanza text, with the spellings and readings that Drik Panchang and Bharat Discovery share: 'ब्रह्म सनातन देवी' (BhaktiBharat 'ब्रह्मा'), 'नाशिनि' (BhaktiBharat 'नासनि'), 'जय सेवक त्राता' (BhaktiBharat 'निज सेवक त्राता'), 'वाहन' (BhaktiBharat 'वहान'), 'हेमांचल', 'सखियन संग राता' (BhaktiBharat 'सखियाँ संगराता'), 'सहस्र'. Drik Panchang has a different sixth stanza and closing stanza (noted on those verses). Bharat Discovery's refrain reads 'मैया जय गौरा माता' and drops 'नन्दी' in stanza 5. Many singers repeat the refrain at the very end. We have not compared against a Gita Press printing.

मूल पाठ को यहाँ बताए गए स्रोतों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया है। अर्थ AI की मदद से लिखा गया मसौदा हैं। अभी किसी विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है।

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त्रुटि बताएँ अंतिम अद्यतन 2026-10-03

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